भक्ति संदेश
मसीह में आत्मिक विकास और परिपक्वता पर शिक्षाएँ।
Pascataap
पश्चाताप केवल पापों को गिनाने की बात नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा का वह गहरा कार्य है जो हृदय को बदलता है और मसीह के लिए स्थान तैयार करता है। तीन चरणों — प्रारंभिक, व्यक्तिगत और निश्चित पश्चाताप — के द्वारा जानें कि परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हुए यीशु मसीह का जीवन आपमें कैसे प्रकट होने लगता है।
Oct 26, 2020
Patan ki trasdi
मनुष्य का पतन एक गहरी त्रासदी थी — शैतान ने महिमा और स्वतंत्रता का वादा किया, पर परिणाम हुआ बंधन और परमेश्वर से दूरी। जानें कि पतन के विभिन्न पहलुओं को समझकर हम उद्धार की गहराई को नए रूप में कैसे पहचान सकते हैं, और क्यों यीशु मसीह ही हमारी सच्ची आशा है।
Oct 26, 2020
Pavitra Aatma
पवित्र आत्मा का बपतिस्मा यीशु मसीह के कार्य का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था — इसके द्वारा परमेश्वर स्वयं हमारे भीतर निवास करने आता है। यूहन्ना 14 से 17 की शिक्षाओं के द्वारा जानें कि पवित्र आत्मा किस प्रकार हमें मसीह के साथ जोड़ता है, पिता के प्रेम में स्थिर करता है, और हमारे जीवन से मसीह की महिमा प्रकट करता है।
Oct 26, 2020
Pavitrikaran
पवित्रीकरण का अर्थ केवल अपने प्रयास से पवित्र बनना नहीं, बल्कि यह कि यीशु मसीह स्वयं हमारी पवित्रता बनें और पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे जीवन में प्रकट हों। जानें कि पुराने मनुष्यत्व की मृत्यु और मसीह के साथ नए जीवन की वास्तविकता किस प्रकार आपको उस नए मनुष्यत्व की ओर ले जाती है जो धार्मिक, दयालु और पवित्र है।
Oct 26, 2020
Praan aur aatma
हमारी आत्मा और हमारे प्राण के बीच के अंतर की स्पष्ट समझ के बिना एक विजयी मसीही जीवन जीना और प्रभु की उपासना तथा सेवा करना असंभव है। इब्रानियों 4:12 के अनुसार जानिए कि परमेश्वर का वचन आत्मा और प्राण के बीच कैसे स्पष्ट अंतर करता है।
Oct 26, 2020
Prarthna ka jeewan
प्रार्थना परमेश्वर के साथ प्रेम की संगति है — और प्रभावशाली प्रार्थना जीवन हमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के साथ गहरे संबंध में ले जाता है। प्रभु की प्रार्थना के सात अद्भुत आयामों के माध्यम से सीखें कि आराधना, आत्मिक युद्ध, क्षमा और सुरक्षा की प्रार्थना आपके जीवन को कैसे संतुलित और सामर्थी बना सकती है।
Oct 26, 2020
Punurutthan ki Mahima
यीशु मसीह का पुनरुत्थान केवल एक महान घटना नहीं — यह नई सृष्टि की शुरुआत है, जिसमें एक ऐसा जीवन प्रकट हुआ जो मृत्यु से परे है। जानें कि पुनरुत्थान की वही महिमा, जो यीशु में प्रकट हुई, पवित्र आत्मा के द्वारा आज आपके भीतर भी कार्य कर रही है।
May 24, 2021
Romiyo ka sandesh
रोमियों की पत्री में पौलुस सुसमाचार की गहरी और व्यवस्थित व्याख्या करता है — यीशु मसीह में परमेश्वर की धार्मिकता, जो विश्वास से विश्वास के लिए प्रकट होती है। जानें कि क्रूस किस प्रकार इतिहास का केंद्र है और मसीह में वह सच्ची धार्मिकता कैसे पाएं जिसकी व्यवस्था मांग करती थी।
Oct 26, 2020
Sacchi Dharmeekta
सच्ची धार्मिकता बाहरी प्रयास से नहीं आती — यह तब प्रकट होती है जब हम अपनी शक्ति और आत्मनिर्भरता से खाली होकर पवित्र आत्मा पर निर्भर होते हैं। जानें कि दिल का खतना क्या है और कैसे जीवन के आत्मा की व्यवस्था हमें पाप और मृत्यु की व्यवस्था से आज़ाद करके मसीह की धार्मिकता में चलाता है।
Oct 26, 2020
Santosh
परमेश्वर ने मनुष्य को आनंद, संगति और अपने पुत्र में जीवन पाने के लिए बनाया है — और वह सच्चा आनंद, जो पाप के कारण खो गया था, नए जन्म के द्वारा फिर से पाया जा सकता है। छोटे बच्चे की तरह यीशु के सामने झुककर उस गहरे आनंद को पाएं जिसे संसार छीन नहीं सकता।
Oct 26, 2020
Shishyata
शिष्यता का अर्थ है यीशु मसीह के पदचिह्नों पर चलना — न केवल उसके वरदानों को पाना, बल्कि उसका क्रूस उठाकर उसके समान बनने की राह पर बने रहना। पौलुस की तरह सब कुछ तुच्छ समझकर केवल मसीह को पकड़ने और उसके पुनरुत्थान की शक्ति में जीने का मार्ग खोजें।
Oct 26, 2020
Vyavastha aur anugraha
व्यवस्था धार्मिकता की मांग करती है, पर उसे पूरा नहीं कर सकती — यीशु मसीह उस मांग का लक्ष्य और उसकी पूर्णता है। जानें कि अनुग्रह केवल क्षमा नहीं, बल्कि वह आत्मिक सामर्थ्य भी है जो पवित्र आत्मा के द्वारा हमें सच्ची धार्मिकता में चलने के योग्य बनाता है।
Aug 8, 2021