Hindi

Santosh

October 26, 2020

सुनें

18 ट्रैक

1. Jine ki khushi

0:00 0:00
1 1. Jine ki khushi --:--
2 2. Jine ki khushi --:--
3 3. Jine ki khushi --:--
4 4. Jine ki khushi --:--
5 5. Paripoorn anand! 1 --:--
6 6. Paripoorn anand 2 --:--
7 7. Paripoorn anand 3 --:--
8 8. Paripoorn anand 4 --:--
9 9. Paripoorn anand 5 --:--
10 10. Paripoorn anand 6 --:--
11 11. Santosh 1 --:--
12 12. Santosh 2 --:--
13 13. Santosh 3 --:--
14 14. Santushti 1 --:--
15 15. Santushti 2 --:--
16 16. Santushti 3 --:--
17 17. Santushti 4 --:--
18 18. Santushti 5 --:--
परमेश्वर ने मनुष्य को आनंद, संगति और अपने पुत्र में जीवन पाने के लिए बनाया है — और वह सच्चा आनंद, जो पाप के कारण खो गया था, नए जन्म के द्वारा फिर से पाया जा सकता है। छोटे बच्चे की तरह यीशु के सामने झुककर उस गहरे आनंद को पाएं जिसे संसार छीन नहीं सकता।
शेयर करें:

विषय समूह

Hindi में आगे बढ़ें

इस विषय से जुड़े और भक्ति संदेश पढ़ें ताकि समझ, प्रार्थना और दैनिक शिष्यता मजबूत हो।

इस विषय को देखें →

संबंधित भक्ति संदेश

Aapki Vastavikta

आपकी असली वास्तविकता केवल वही नहीं है जो आँखें देखती हैं — मसीह में आपका जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है, और आप स्वर्गीय बुलाहट के सहभागी हैं। जानें कि इस आत्मिक वास्तविकता को विश्वास के द्वारा कैसे ग्रहण करें, और इस पृथ्वी पर परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में उसकी महिमा को कैसे प्रकट करें।

Aatma me mazboot

आत्मा में मजबूत होना मसीही जीवन की नींव है — जब तक हम आत्मिक सजगता में नहीं बढ़ते, हम आसानी से भ्रम, भय और शत्रु के प्रभाव में आ सकते हैं। सीखें कि आत्मा में मसीह के साथ गहरी एकता कैसे बनाएं, और उसके प्रेम की संगति में बढ़ते हुए हर संघर्ष में स्थिर कैसे रहें।

Aatmeek juddh

आत्मिक युद्ध में विजय के लिए जागरूक, साहसी और अनुशासित आत्मा चाहिए — लापरवाही और डर की नहीं। परमेश्वर से प्रेम और बुराई से घृणा के साथ उठें, और अपने विचारों और भावनाओं को यीशु मसीह के अधीन करके शत्रु का सामना करना सीखें।

Adhyaatmeek prakaashan

परमेश्वर की वास्तविकता को केवल सुनकर नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाशन के द्वारा गहराई से समझा जाता है — जब हमारी आत्मिक आँखें खुलती हैं, तो अय्यूब की तरह हम कह उठते हैं, "अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं।" पवित्र आत्मा के इस प्रकाशन को ग्रहण करें और यीशु मसीह के स्वरूप में बदलते जाएं।