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Vyavastha aur anugraha

August 8, 2021

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व्यवस्था और अनुग्रह 1

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व्यवस्था धार्मिकता की मांग करती है, पर उसे पूरा नहीं कर सकती — यीशु मसीह उस मांग का लक्ष्य और उसकी पूर्णता है। जानें कि अनुग्रह केवल क्षमा नहीं, बल्कि वह आत्मिक सामर्थ्य भी है जो पवित्र आत्मा के द्वारा हमें सच्ची धार्मिकता में चलने के योग्य बनाता है।
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Aapki Vastavikta

आपकी असली वास्तविकता केवल वही नहीं है जो आँखें देखती हैं — मसीह में आपका जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है, और आप स्वर्गीय बुलाहट के सहभागी हैं। जानें कि इस आत्मिक वास्तविकता को विश्वास के द्वारा कैसे ग्रहण करें, और इस पृथ्वी पर परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में उसकी महिमा को कैसे प्रकट करें।

Aatma me mazboot

आत्मा में मजबूत होना मसीही जीवन की नींव है — जब तक हम आत्मिक सजगता में नहीं बढ़ते, हम आसानी से भ्रम, भय और शत्रु के प्रभाव में आ सकते हैं। सीखें कि आत्मा में मसीह के साथ गहरी एकता कैसे बनाएं, और उसके प्रेम की संगति में बढ़ते हुए हर संघर्ष में स्थिर कैसे रहें।

Aatmeek juddh

आत्मिक युद्ध में विजय के लिए जागरूक, साहसी और अनुशासित आत्मा चाहिए — लापरवाही और डर की नहीं। परमेश्वर से प्रेम और बुराई से घृणा के साथ उठें, और अपने विचारों और भावनाओं को यीशु मसीह के अधीन करके शत्रु का सामना करना सीखें।

Adhyaatmeek prakaashan

परमेश्वर की वास्तविकता को केवल सुनकर नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाशन के द्वारा गहराई से समझा जाता है — जब हमारी आत्मिक आँखें खुलती हैं, तो अय्यूब की तरह हम कह उठते हैं, "अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं।" पवित्र आत्मा के इस प्रकाशन को ग्रहण करें और यीशु मसीह के स्वरूप में बदलते जाएं।