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Pavitra Aatma

October 26, 2020

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1. Pavitra Aatma ka baptisma

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1 1. Pavitra Aatma ka baptisma
2 2. Pavitra Aatma ka kaarya
3 3. Pavitra Aatma 1
4 4. Pavitra Aatma 2
5 5. Pavitra Aatma 3
6 6. Pavitra Aatma 4
7 7. Pavitra Aatma 5
8 8. Pavitra Aatma 6
9 9. Pavitra Aatma 7
10 10. Pavitra Aatma 8
11 11. Pavitra Aatma 9
12 12. Pavitra Aatma 10
13 13. Pavitra Aatma 11
14 14. Pavitra Aatma 12
15 15. Pavitra Aatma 13
16 16. Pavitra Aatma 14
17 17. Pavitra Aatma 15
18 18. Pavitra Aatma 16
19 19. Pavitra Aatma 17
20 20. Satya ka Aatma
पवित्र आत्मा का बपतिस्मा यीशु मसीह के कार्य का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था — इसके द्वारा परमेश्वर स्वयं हमारे भीतर निवास करने आता है। यूहन्ना 14 से 17 की शिक्षाओं के द्वारा जानें कि पवित्र आत्मा किस प्रकार हमें मसीह के साथ जोड़ता है, पिता के प्रेम में स्थिर करता है, और हमारे जीवन से मसीह की महिमा प्रकट करता है।

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आपकी असली वास्तविकता केवल वही नहीं है जो आँखें देखती हैं — मसीह में आपका जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है, और आप स्वर्गीय बुलाहट के सहभागी हैं। जानें कि इस आत्मिक वास्तविकता को विश्वास के द्वारा कैसे ग्रहण करें, और इस पृथ्वी पर परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में उसकी महिमा को कैसे प्रकट करें।

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आत्मा में मजबूत होना मसीही जीवन की नींव है — जब तक हम आत्मिक सजगता में नहीं बढ़ते, हम आसानी से भ्रम, भय और शत्रु के प्रभाव में आ सकते हैं। सीखें कि आत्मा में मसीह के साथ गहरी एकता कैसे बनाएं, और उसके प्रेम की संगति में बढ़ते हुए हर संघर्ष में स्थिर कैसे रहें।

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परमेश्वर की वास्तविकता को केवल सुनकर नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाशन के द्वारा गहराई से समझा जाता है — जब हमारी आत्मिक आँखें खुलती हैं, तो अय्यूब की तरह हम कह उठते हैं, "अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं।" पवित्र आत्मा के इस प्रकाशन को ग्रहण करें और यीशु मसीह के स्वरूप में बदलते जाएं।

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