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Parmeshwar ke saat rishta

October 26, 2020

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1. Asli rishta Parmeshwar ke saath

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1 1. Asli rishta Parmeshwar ke saath --:--
2 2. Aveebhajit focus --:--
3 3. Ekta me paripoornata --:--
4 4. Janam denewala preem --:--
5 5. Jesu ke kareeb 1 --:--
6 6. Jesu ke kareeb 2 --:--
7 7. Jesu ke kareeb 3 --:--
8 8. Jesu ke kareeb 4 --:--
9 9. Jesu ke kareeb 5 --:--
10 10 Koi bharosa nahi, koi daayitv nahi! --:--
11 11. Koi moorti nahi --:--
12 12. Komalta ke maadhyam se bacaya 1 --:--
13 13. Komalta ke maadhyam se bacaya 2 --:--
14 14. Komalta mmadhyam se bacaya 3 --:--
15 15. Komalta madhyam se bacaya 4 --:--
16 16. Masih cetna --:--
17 17. Masih kendritataa --:--
18 18. Masih ki patri --:--
19 19. Masihi jeewan ka rahasya 1 --:--
20 20. Masihi jeewan ka rahasya 2 --:--
21 21. Masihi jeewan ka rahasya 3 --:--
22 22. Masihi jeewan ka rahasya 4 --:--
23 23. Masihi jeewan ka rahasya 5 --:--
24 24. Mere praan ka premi --:--
25 25. Parmeshwar dvaara paribhasheet --:--
26 26. Parmeshwar ke pyaar se santript 1 --:--
27 27. Parmeshwar ke pyaar se santript 2 --:--
28 28. Parmeshwar ko janna --:--
29 29. Yeshu ke paas aaoo! 1 --:--
30 30. Yeshu ke paas aaoo 2 --:--
31 31. Yeshu ke paas aaoo 3 --:--
32 32. Yeshu ke paas aaoo 4 --:--
परमेश्वर के साथ असली रिश्ता भय या केवल धर्म-कर्म से नहीं, बल्कि उस पर निर्भरता, अधीनता और प्रेम-भरी भक्ति से बनता है। इस श्रृंखला में जानें कि आत्मा के द्वारा यीशु के साथ दाखलता और डाली जैसा जीवित संबंध कैसे स्थापित हो, और उस प्रेम की संगति में संतुलित और फलदायी मसीही जीवन कैसे जिया जाए।
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आपकी असली वास्तविकता केवल वही नहीं है जो आँखें देखती हैं — मसीह में आपका जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है, और आप स्वर्गीय बुलाहट के सहभागी हैं। जानें कि इस आत्मिक वास्तविकता को विश्वास के द्वारा कैसे ग्रहण करें, और इस पृथ्वी पर परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में उसकी महिमा को कैसे प्रकट करें।

Aatma me mazboot

आत्मा में मजबूत होना मसीही जीवन की नींव है — जब तक हम आत्मिक सजगता में नहीं बढ़ते, हम आसानी से भ्रम, भय और शत्रु के प्रभाव में आ सकते हैं। सीखें कि आत्मा में मसीह के साथ गहरी एकता कैसे बनाएं, और उसके प्रेम की संगति में बढ़ते हुए हर संघर्ष में स्थिर कैसे रहें।

Aatmeek juddh

आत्मिक युद्ध में विजय के लिए जागरूक, साहसी और अनुशासित आत्मा चाहिए — लापरवाही और डर की नहीं। परमेश्वर से प्रेम और बुराई से घृणा के साथ उठें, और अपने विचारों और भावनाओं को यीशु मसीह के अधीन करके शत्रु का सामना करना सीखें।

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परमेश्वर की वास्तविकता को केवल सुनकर नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाशन के द्वारा गहराई से समझा जाता है — जब हमारी आत्मिक आँखें खुलती हैं, तो अय्यूब की तरह हम कह उठते हैं, "अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं।" पवित्र आत्मा के इस प्रकाशन को ग्रहण करें और यीशु मसीह के स्वरूप में बदलते जाएं।