Hindi

Parmeshwar ka jan banna

December 24, 2020

Listen

29 tracks

परमेश्वर का जन बनना

0:00
1 परमेश्वर का जन बनना
2 परमेश्वर का जन बनना
3 परमेश्वर का जन बनना
4 परमेश्वर का जन बनना
5 परमेश्वर का जन बनना
6 परमेश्वर का जन बनना
7 परमेश्वर का जन बनना
8 परमेश्वर का जन बनना
9 परमेश्वर का जन बनना
10 परमेश्वर का जन बनना
11 परमेश्वर का जन बनना
12 परमेश्वर का जन बनना
13 परमेश्वर का जन बनना
14 परमेश्वर का जन बनना
15 परमेश्वर का जन बनना
16 परमेश्वर का जन बनना
17 परमेश्वर का जन बनना
18 परमेश्वर का जन बनना
19 परमेश्वर का जन बनना
20 परमेश्वर का जन बनना
21 परमेश्वर का जन बनना
22 परमेश्वर का जन बनना
23 परमेश्वर का जन बनना
24 परमेश्वर का जन बनना
25 परमेश्वर का जन बनना
26 परमेश्वर का जन बनना
27 परमेश्वर का जन बनना
28 परमेश्वर का जन बनना
29 परमेश्वर का जन बनना
परमेश्वर अक्सर टूटे, नम्र और खुद के ऊपर निर्भर न रहने वाले लोगों को चुनता है — क्योंकि वही लोग उसके हाथ में उपयोगी बनते हैं। इस श्रृंखला में सीखें कि प्रभु आपको परमेश्वर का एक सच्चा जन बनाने के लिए आपके जीवन में एक के बाद एक क्षेत्र से कैसे गुज़रते हैं।

Topic Cluster

Continue growing in Hindi

Read more devotionals gathered around this theme to strengthen understanding, prayer, and daily discipleship.

Explore this topic →

Related Devotionals

Aapki Vastavikta

आपकी असली वास्तविकता केवल वही नहीं है जो आँखें देखती हैं — मसीह में आपका जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है, और आप स्वर्गीय बुलाहट के सहभागी हैं। जानें कि इस आत्मिक वास्तविकता को विश्वास के द्वारा कैसे ग्रहण करें, और इस पृथ्वी पर परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में उसकी महिमा को कैसे प्रकट करें।

Aatma me mazboot

आत्मा में मजबूत होना मसीही जीवन की नींव है — जब तक हम आत्मिक सजगता में नहीं बढ़ते, हम आसानी से भ्रम, भय और शत्रु के प्रभाव में आ सकते हैं। सीखें कि आत्मा में मसीह के साथ गहरी एकता कैसे बनाएं, और उसके प्रेम की संगति में बढ़ते हुए हर संघर्ष में स्थिर कैसे रहें।

Aatmeek juddh

आत्मिक युद्ध में विजय के लिए जागरूक, साहसी और अनुशासित आत्मा चाहिए — लापरवाही और डर की नहीं। परमेश्वर से प्रेम और बुराई से घृणा के साथ उठें, और अपने विचारों और भावनाओं को यीशु मसीह के अधीन करके शत्रु का सामना करना सीखें।

Adhyaatmeek prakaashan

परमेश्वर की वास्तविकता को केवल सुनकर नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाशन के द्वारा गहराई से समझा जाता है — जब हमारी आत्मिक आँखें खुलती हैं, तो अय्यूब की तरह हम कह उठते हैं, "अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं।" पवित्र आत्मा के इस प्रकाशन को ग्रहण करें और यीशु मसीह के स्वरूप में बदलते जाएं।

0:00 0:00