आज का वचन
आपके दिन के लिए प्रोत्साहन का एक वचन।
आत्मा-सचेत बनें!
"मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उसमें है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा।"
यह भक्ति-संदेश थोड़ा अलग होने वाला है!
मैं बाइबल की कुछ आयतें साझा करना चाहता हूँ, जिन पर मैंने कई वर्षों से प्रतिदिन मनन किया है, ताकि मैं अपनी आत्मा—अपने अंतर्मन—के प्रति सचेत हो सकूँ।
शायद ये शब्द आपको भी एक मजबूत आध्यात्मिक-चेतना विकसित करने में मदद कर सकते हैं:
”कि पिता अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ।” (इफ.3:16)
”परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसकी आराधना करनेवाले आत्मा और सच्चाई से आराधना करें।” (यूह.4:24)
”जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। ” (यूह.3:6)
”तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो, परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिससे हम हे अब्बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं।“
“आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं;” (रोम.8:15-16)
”यहोवा आकाश का ताननेवाला, पृथ्वी की नींव डालनेवाला और मनुष्य के भीतर उसकी आत्मा का रचनेवाला है।” (Zech.12:1)
”रात के समय मैं अपने प्राण से तेरी लालसा करता हूँ, निश्चय ही मेरे भीतर मेरी आत्मा तुझे यत्न से ढूंढती है।”
(यश.26:9)
“मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है और मेरी आत्मा मेरे उद्धार करनेवाले परमेश्वर से आनन्दित हुई;” (लूका 1:46-47)
”परमेश्वर की सेवा मैं अपनी आत्मा से उसके पुत्र के सुसमाचार के विषय में करता हूँ;” (रोम.1:9)
”जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।” (1 कुर.6:17)
”इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, जिसके विषय में लिखा है, “मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला।” अत: हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं। ” (2 कुर.4:13)
”इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्ट होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। (2 कुर.4:16)
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