आज का वचन

आपके दिन के लिए प्रोत्साहन का एक वचन।

शनिवार, 12 सितम्बर 2026

सही केंद्र-बिंदु

"पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ्य तुझ पर छाया करेगी; इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्‍वर का पुत्र कहलाएगा।"
— लूका 1:35

पवित्र आत्मा परमेश्वर की सृजनात्मक शक्ति है, और नए जन्म में वह हममें परमेश्वर के पवित्र पुत्र का निर्माण करता है।

अब हमारा काम यह है कि हम इस पवित्र बच्चे की देखभाल करें, उसे खिलाएँ और उसका पालन-पोषण करें, ताकि वह एक परिपक्व व्यक्ति के रूप में बड़ा हो और हमारे अंदर और हमारे माध्यम से अपना सम्पूर्ण जीवन जी सके।

यीशु में वचन के लिए तीव्र भूख और प्यास है और वह दिन-रात उस पर ध्यान लगाकर परमेश्वर की शिक्षा से अपना आध्यात्मिक पोषण प्राप्त करना चाहता है, ताकि वह वचन में निहित आत्मा को पी सके और जल की धाराओं के किनारे लगाए गए वृक्ष की तरह बन सके, जो हमेशा स्वस्थ, हरा और फलदायी हो।

क्या यह आपमें और मुझमें उसके लिए संभव है?

उसकी अंतरतम इच्छा हमेशा अपने पिता के घर में रहना और उसके साथ घनिष्ठ प्रेमपूर्ण संगति में रहना है, ताकि वह अपने पिता की इच्छा के साथ पूरी तरह से एक हो जाए, और वह "बुद्धि, आयु और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में” बढ़ता जाए ताकि वह अपने जीवन के लिए अपने पिता की योजनाओं और उद्देश्यों को पूरा कर सके और अपने सभी कार्यों के माध्यम से अपने पिता की महिमा कर सके।

क्या आप और मैं उसके लिए यह संभव करते हैं?

हमें एक ऐसे बिंदु पर आना चाहिए जहाँ हमारा व्यक्तिगत जीवन और परिस्थितियाँ, चाहे अच्छी हों या बुरी, सुखद हों या अप्रिय, हमारे लिए बिल्कुल भी मायने नहीं रखतीं। हमारे अस्तित्व का एकमात्र कारण यीशु मसीह को हमारे अंदर प्रकट होने देना और उसके स्वर्गीय पिता की संतुष्टि के लिए हमारे माध्यम से जो कार्य करना चाहता है, उन्हें पूरा कर सके।

मसीह स्वयं मसीही जीवन का कारण, रहस्य और लक्ष्य है।

क्या यह आपके और मेरे जीवन के बारे में सच है?

पवित्र आत्मा को मसीह को अपका केंद्र-बिंदु करने दें!

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