आज का वचन
आपके दिन के लिए प्रोत्साहन का एक वचन।
चुनौती
"यहोवा ने मुझे गर्भ ही में से बुलाया, जब मैं माता के पेट में था, तब ही उसने मेरा नाम बताया। उसने मेरे मुँह को चोखी तलवार के समान बनाया और अपने हाथ की आड़ में मुझे छिपा रखा; उसने मुझ को चमकीला तीर बनाकर अपने तर्कश में गुप्त रखा; और मुझ से कहा, “तू मेरा दास है, मैं तुझ में अपनी महिमा प्रगट करूँगा।"
(यशायाह 49:1-3; गल.1:15-16 देखें)।
प्रत्येक पुरुष और महिला के जीवन में एक “माउंट एवरेस्ट” है: वह सर्वोच्च लक्ष्य और उद्देश्य जिसके लिए आप पैदा हुए और बचाए गए, आपके अस्तित्व का कारण।
यदि आप इसे चूक जाए, तो आपका जीवन व्यर्थ था, यदि आप उस तक पहुंच जाए, तो वहां पहुंचने के लिए आपको जिन कठिनाइयों और कष्टों से गुजरना पड़ा, वे सार्थक से कहीं अधिक थे।
हममें से अधिकांश लोग निचले स्तर पर बसना चुन लेते हैं।
ऐसा करने से हम "गुनगुने" हो जाते हैं और अपने जीवन और सेवा की धार खो देते हैं।
पौलूस को मसीह ने पकड़ लिया था और उसका पूरा जीवन उसकी बुलाहट के उच्च उद्देश्य की ओर एक दौड़ था, और अपने जीवन के अंत में, यह कह सका, "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धार्मिकता का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धार्मीक और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा, और मुझे ही नहीं वरन् उन सब को भी जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।”
हमारे जीवन के उच्च उद्देश्य के लिए जीवन एक चुनौतीपूर्ण युद्ध है।
हममें से अधिकांश को लड़ना पसंद नहीं है, लेकिन जो लड़ने से इनकार करता है वह कभी नहीं जीतता।
बाइबल की अंतिम पुस्तक में सात बार परमेश्वर का आत्मा हमें यह चुनौती देता है: "जो जय पाए वह…. ।"
मूसा ने “पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दु:ख भोगना अधिक उत्तम लगा। उसने मसीह के कारण निन्दित होने को मिस्र के भण्डार से बड़ा धन समझा, क्योंकि उसकी आँखें प्रतिफल पाने की ओर लगी थीं।” (इब्र.11:25-26)
आप किस चुनौती का सामना कर रहे हैं, आपके सामने कौन-कौन से विकल्प हैं?
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